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सागर। गतिशील साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था “स्वर संगम” द्वारा स्मृतिशेष शायर दुष्यन्त कुमार एवं ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह की स्मृति में आयोजित ग़ज़लों का कार्यक्रम “गुलदस्ता” गर्ल्स डिग्री कॉलेज सागर के सभागार में भव्यता के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में दुष्यन्त कुमार और जगजीत सिंह की चुनिंदा ग़ज़लों ने श्रोताओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध किए रखा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसवीएन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ आदित्य प्रखर तिवारी रहे, जबकि अध्यक्षता संगीत श्रीता समाज के अध्यक्ष डॉ अशोक कुमार तिवारी ने की। विशिष्ट अतिथियों में डॉ शैलेन्द्र सिंह (सुकृत अस्पताल), डॉ आनंद तिवारी (प्राचार्य, गर्ल्स डिग्री कॉलेज), विनय मिश्रा (अध्यक्ष, जनभागीदारी समिति) एवं समाजसेवी हेमंत पोतदार शामिल रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पूजन-अर्चन से हुई। इसके पश्चात दुष्यन्त कुमार एवं जगजीत सिंह के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें स्मरण किया गया। स्वस्तिवाचन डॉ रविन्द्र सिलाकारी ने कराया।

संस्था अध्यक्ष हरिसिंह ठाकुर ने दुष्यन्त कुमार एवं जगजीत सिंह के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए “गुलदस्ता” कार्यक्रम के 26 वर्षों के गौरवशाली सफर की जानकारी दी। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध शायर अशोक मिज़ाज को “दुष्यन्त स्मृति सम्मान” से सम्मानित किया गया। सम्मान पत्र का वाचन प्रीत संस्था के संस्थापक राघवेन्द्र नायक ने किया। कार्यक्रम का सशक्त एवं प्रभावशाली संचालन आकाशवाणी की उद्घोषिका साहिबा नासिर ने किया।

मुख्य अतिथि डॉ आदित्य प्रखर तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि दुष्यन्त कुमार और जगजीत सिंह ने अल्प आयु में ही साहित्य और संगीत की अमूल्य धरोहर दी। अध्यक्ष डॉ अशोक कुमार तिवारी ने ग़ज़ल के विविध पक्षों पर प्रकाश डालते हुए 26 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम की सराहना की। डॉ आनंद तिवारी ने कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन समाज की आवश्यकता हैं, क्योंकि अच्छा साहित्य ही समाज को ऊंचाइयों तक ले जाता है। वहीं विनय मिश्रा ने आयोजन को प्रेरणादायक बताया।

कार्यक्रम के द्वितीय चरण की शुरुआत निधिबाला की सरस्वती वंदना से हुई। उन्होंने दुष्यन्त कुमार की ग़ज़ल “ये ज़ुबां हमसे सी नहीं जाती…” प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी।
डॉ शैलेन्द्र सिंह ने “तुमको निहारता हूं…” एवं अशोक मिज़ाज की ग़ज़ल “खूबसूरत कलाम लिखता हूं…” सुनाई।
जगदीश सागर ने “कहीं पे धूप की चादर…” और “तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है…” प्रस्तुत कीं।
सुप्रसिद्ध ग़ज़ल गायक मितेन्द्र सिंह सेंगर ने जगजीत सिंह की ग़ज़लों “कुछ खोना कुछ पाना…” सहित अन्य रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
डॉ रचना श्रीवास्तव ने “दिल में इक लहर सी उठी है अभी…” सुनाई।
कौशिकी श्रीवास्तव की मधुर प्रस्तुति “आज जाने की ज़िद न करो…” पर श्रोताओं ने भरपूर सराहना की।
अर्पित तिवारी ने “मौसम को इशारों से बुला…” और अंत में शिवरतन यादव ने दुष्यन्त कुमार की ग़ज़ल “इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है…” प्रस्तुत की।

संगत में तबले पर शैलेन्द्र सिंह राजपूत, सिंथेसाइज़र पर भारत श्रीवास्तव, गिटार पर प्रियंक तैलंग, कपिल सागर, देवेश सागर, रवि राज सहित अन्य कलाकारों ने प्रभावशाली प्रस्तुति दी। सभी कलाकारों एवं मंच संचालक साहिबा नासिर को शाल, श्रीफल एवं सम्मान राशि से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, गणमान्य नागरिक एवं सुधि श्रोता उपस्थित रहे। देर रात तक तालियों की गड़गड़ाहट के बीच चला यह आयोजन अपनी अविस्मरणीय छाप छोड़ गया। अंत में आभार प्रदर्शन संस्था अध्यक्ष हरिसिंह ठाकुर ने किया।

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